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February 8, 2012

प्रेम प्रभु का वरदान है — लीला तिवानी

Filed under: Uncategorized — aloksah @ 5:23 am

प्रेम मन की आशा है,
करता दूर निराशा है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम जीवन की परिभाषा है.

प्रेम से ही सुमन महकते हैं,
प्रेम से ही पक्षी चहकते हैं,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम से ही सूरज-चांद-तारे चमकते हैं.

प्रेम शीतल-मंद-सुवासित बयार है,
ऋतुओं में बसंत बहार है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम आनंद का आधार है.

प्रेम हमारी आन है,
प्रेम देश की शान है,
चन्द शब्दों में कहें तो,
प्रेम प्रभु का वरदान है.

Poet: लीला तिवानी

Source : http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/rasleela/entry/%E0%A4%AA-%E0%A4%B0-%E0%A4%AE-%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A4%AD-%E0%A4%95-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A4%A6-%E0%A4%A8-%E0%A4%B9

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