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March 28, 2009

mer pahad

Filed under: Uncategorized — aloksah @ 11:01 am
अगरमेरागांवमेरादेशहोसकताहै
तोम्यारपहाड़क्योंनही ?
मेरापहाड़लेकिनऐसाकहनेसेयेसिर्फमेराहोकरनहीरहजातायेतोसबकाहैवैसे
हीजैसेमेराभारतहरभारतवासीकाभारत।खैरपहाड़कोआजदोअलगअलगदृष्टिसे
देखनेकीकोशिशकरतेहैं, एककल्पनाकेलोकमेंऔरदूसरासच्चाईकेधरातलमें।
जिनकीनई नईशादियांहोतीहैंहनीमूनकेलियेउनमेंज्यादातरकीपहलीयादूसरीपसंद
होतीहैकोईहिलस्टेशन।बच्चोंकीगर्मियोंकीछुट्टीहोतीहैउनकीभीपहलीया
दूसरीपसंदहोताहैकोईहिलस्टेशन, अबबूढ़ेहोचलेहैंधर्मकर्मकरनेमनहोचला
हैतोभीयादआताहैम्यारपहाड़चारधामकीयात्राकेलिये।
पहाड़कीखूबसूरतीहोतीहीऐसीहैकिकिसीकोभीबरबसअपनीतरफआकर्षितकरले,
वो ऊंचीऊंचीपहाड़ियाँ, सर्दियोंमेंबर्फसेढकीवादियाँ, पहाड़ोंकोचुमनेकोबेताब
दिखतेबादल ,मदमस्तकिसीअलहड़सीभागतीपहाड़ीनदियां, सांपकीतरहभागतीहुई दिखायीदेतीसड़कें, कहींदिखायीदेतेवोसीढ़ीनुमाखेततोकहींदिलकोदहलादेनी
वालीघाटियां , जाड़ोंकीगुनगुनीधूपऔरगर्मियोंकीशीतलता।शायदयहीसबहैजो
लोगोंकोअपनीऔरखिंचताहै, बरबसउन्हेंआकर्षितकरताहैअपनेतरफआनेको।
लेकिनपहाड़ मेंरहनेवालेकेलिये, एकपहाड़ीकेलियेयेशायदरोजकीहीबातहो !!

मेरापहाड़सेक्यारिश्ताहैयेबतानामैंआवश्यकनहींमानतापरपहाड़मेरेलिये

माँकाआंचलहै ,मिट्टीकीसौंधीमहकहै , ‘ हिसालूकेटूटेमनकेहै ,
काफलकोनमक तेलमेंमिलाकरबनास्वादिष्टपदार्थहै ,
क़िलमोड़ीऔरघिंघारू
केस्वादिष्ट जंगलीफलहैं ,
भटकीचुणकाणी है ,
घौतकीदालहै ,
मूली दही डालकेसानाहुआनीबूहै
बेड़ूपाकोबारामासा है ,
मडुवेकीरोटीहै
मादिरेकाभातहै ,
घटकापिसाहुआआटाहै ,
ढिटालूकीबंदूकहै ,
पालकका कापाहै ,
दाणिमकीचटनी है।
मैंपहाड़कोकिसीकविकीआँखोंसेनयी नवेलीदुल्हनकी तरहभीदेखताहूंजहांचीड़
औरदेवदारुकेवनोंकेबीचसरसरसरकतीहुईहवाकानोंमेंफुसफुसाकरनाजानेक्या
कहजातीहैऔरएकचिंतितऔरसंवेदनशीलव्यक्तिकीतरहभीजोजन , जंगल ,जमीनकी
लड़ाईकेलियेदेहकोढालबनाकरलड़रहाहै. लेकिनमैंनहींदेखपाताहूँपहाड़को
तो.. डिजिटल कैमरालटकायेपर्यटककीभाँतिजोहरखूबसूरतदृश्य कोअपनेकैमरेमें
कैदकरअपनेदोस्तोंकेसाथबांटनेपरअपनेकीतीसमारखांसमझने लगताहै।
पहाड़, शिवकीजटासेनिकलीहुईगंगाहै, कालिदासकाअट्टाहासहै, पहाड़सत्यका
प्रतीकहै , जीवनकासाश्वतसत्यहै।कठिनपरिस्थितियोंमेंभीहँसहँसकरजीनेकी
कलासिखानेवालीपाठशालाहै. गाड़, गध्यारोंऔरनौलेकाशीतल, निर्मलजलहै,
तिमिल केपेड़कीछांहहै, बांजऔरबुरांसकाजंगलहै, आदमखोरलकड़बग्घोंकीकर्मभूमिहै।
मिट्टीमेंलिपटे, सिंगाणेकेलिपोड़ेकोकमीजकीबांहसेपोछ्तेनौनिहालोंकी
क्रीड़ास्थली है।
मोव ( गोबर) कीडलियाकोसरमेंलेजातीमहिलाकीदिनचर्याहै,
पिरूलसारती , ऊंचेऊंचेभ्योलोंमेंघासकाटतीऔरतकाजीवनहै।
कैसेभूलसकताहैकोईऎसेपहाड़को, पहाड़तूनेहीतोदीथीमुझेकठोरहोकरजीवनकी
आपाधापियोंसे लड़नेकीशिक्षा।कैसेभूलसकताहूँमैंअसोजकेमहीनेमेंसिरपर
घासकेगट्ठरकाढोना, असोजमेंबारिशकीतनिकआशंकासेसूखीघासकोसारकेफटाफट
लूटेकाबनाना, फटीएड़ियोंकोकिसीक्रैकक्रीमसेनहींबल्कितेलकीबत्तीसे
डामनाफिरवैसलीननहींबल्किमोमतेलसेउनचीरोंकोभरना, लीसेकेछिलुकेसे
सुबहसुबहचूल्हे…..
By Kakesh
http://kakesh.com/
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